सरकार ने 22 प्रतिशत से 30 प्रतिशत तक इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी में छूट देने का फैसला किया है। नई अधिसूचना के बाद उच्च इथेनॉल मिश्रण वाला ईंधन अपेक्षाकृत कम कीमत पर उपलब्ध हो सकेगा। इस कदम का उद्देश्य वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देना और पेट्रोल पर निर्भरता कम करना है। इथेनॉल मिश्रण बढ़ने से आयातित कच्चे तेल पर खर्च घटाने में भी मदद मिल सकती है। हालांकि, इस बदलाव को लेकर वाहन मालिकों के बीच कई सवाल और चिंताएं सामने आ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सभी वाहन उच्च इथेनॉल मिश्रित ईंधन के लिए उपयुक्त नहीं होते। पुराने मॉडल की गाड़ियों में इंजन और ईंधन प्रणाली पर अतिरिक्त प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है। वाहन निर्माताओं को भी नए मानकों के अनुरूप तकनीकी बदलाव करने पड़ सकते हैं। उपभोक्ताओं के लिए यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि उनकी गाड़ी E30 ईंधन के अनुकूल है या नहीं। एक हालिया सर्वे में वाहन खरीदने को लेकर लोगों की झिझक भी सामने आई है। सर्वे के अनुसार 43 प्रतिशत लोगों ने अगले वर्ष नई कार खरीदने की इच्छा नहीं जताई। ईंधन तकनीक में तेजी से हो रहे बदलावों को इसकी एक वजह माना जा रहा है। सरकार और उद्योग जगत इस बदलाव को ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरणीय लक्ष्यों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं। आने वाले समय में E30 पेट्रोल के व्यापक उपयोग और उसके प्रभावों पर सभी की नजर रहेगी।
Source: Source