भारत सरकार ने अंडमान-निकोबार क्षेत्र में रणनीतिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में नया कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय ने INS बाज के विस्तार के बजाय चिंगेन क्षेत्र में एक नया डुअल-यूज ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट विकसित करने की योजना पर जोर दिया है। यह हवाई अड्डा नागरिक और सैन्य दोनों उद्देश्यों के लिए उपयोग किया जा सकेगा। अधिकारियों के अनुसार यह निर्णय पर्यावरणीय संतुलन और स्थानीय जनजातीय हितों को ध्यान में रखकर लिया गया है। प्रस्तावित परियोजना का रणनीतिक महत्व बेहद अहम माना जा रहा है। यह क्षेत्र मलक्का जलडमरूमध्य के निकट स्थित है, जो दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। इस स्थान से हिंद महासागर और आसपास के समुद्री क्षेत्रों पर निगरानी क्षमता बढ़ेगी। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत की सामरिक उपस्थिति और परिचालन क्षमता मजबूत होगी। परियोजना क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री निगरानी के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसके माध्यम से आपदा राहत, लॉजिस्टिक्स और नागरिक उड्डयन सेवाओं को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। भारत लंबे समय से अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में बुनियादी ढांचे के विकास पर ध्यान दे रहा है। नई परियोजना को इसी रणनीतिक दृष्टिकोण का हिस्सा माना जा रहा है। इससे क्षेत्र में भारत की सुरक्षा और संपर्क क्षमताओं को और मजबूती मिलने की संभावना है।
Source: Source