चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की प्योंगयांग यात्रा ने चीन और उत्तर कोरिया के संबंधों को एक बार फिर वैश्विक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। यह उनकी 2019 के बाद पहली उत्तर कोरिया यात्रा मानी जा रही है। दोनों देशों के रिश्तों को अक्सर ‘होंठ और दांत जितने करीब’ बताया जाता रहा है। दशकों से चीन उत्तर कोरिया का प्रमुख राजनीतिक और आर्थिक साझेदार रहा है। हालांकि दोनों देशों के संबंधों में समय-समय पर उतार-चढ़ाव भी देखने को मिले हैं। परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर कई बार मतभेद उभरते रहे हैं। इसके बावजूद दोनों देशों ने रणनीतिक सहयोग बनाए रखा है। प्योंगयांग में शी जिनपिंग का स्वागत उच्च स्तर पर किया गया। इस यात्रा को द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि बदलते वैश्विक राजनीतिक माहौल में दोनों देशों का सहयोग और अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है। क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और कूटनीतिक समन्वय यात्रा के प्रमुख विषयों में शामिल हो सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस मुलाकात के संभावित प्रभावों पर नजर बनाए हुए है। यह यात्रा पूर्वी एशिया की राजनीति और शक्ति संतुलन के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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