नुसेरात में हुए सैन्य अभियान के दो वर्ष बाद भी प्रभावित परिवारों का दर्द कम नहीं हुआ है। एक जीवित बचे परिवार ने बताया कि उस घटना की यादें आज भी उनका पीछा कर रही हैं। अभियान के दौरान चार बंधकों को मुक्त कराया गया था, लेकिन इसके साथ भारी जनहानि और विनाश की खबरें भी सामने आई थीं। प्रभावित लोगों का कहना है कि शारीरिक घावों के साथ मानसिक आघात भी अब तक बना हुआ है। कई परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया और घरों को नष्ट होते देखा। घटना के बाद का जीवन लगातार भय और असुरक्षा की भावना से प्रभावित रहा है। पीड़ितों के अनुसार रातों की नींद और सामान्य जीवन अब भी पूरी तरह वापस नहीं लौट पाया है। मनोवैज्ञानिक प्रभावों ने बच्चों और वयस्कों दोनों को प्रभावित किया है। संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास और मानसिक स्वास्थ्य सहायता की आवश्यकता लगातार महसूस की जा रही है। मानवीय संगठनों ने पीड़ित परिवारों के लिए दीर्घकालिक सहायता की जरूरत पर जोर दिया है। यह घटना आज भी क्षेत्र में संघर्ष की मानवीय कीमत की याद दिलाती है। प्रभावित परिवार न्याय, सुरक्षा और स्थायी शांति की मांग कर रहे हैं। दो साल बाद भी उस दिन की भयावह यादें और दर्द उनके जीवन का हिस्सा बने हुए हैं।
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