के संभावित आईपीओ को लेकर वैश्विक स्तर पर भारी उत्साह देखा जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार इस आईपीओ का अनुमानित आकार करीब 1.75 ट्रिलियन डॉलर तक बताया जा रहा है, जिससे निवेशकों में काफी रुचि बढ़ी है। बैंकरों के मुताबिक उपलब्ध शेयरों की तुलना में मांग लगभग दोगुनी है। हालांकि भारतीय निवेशक इस आईपीओ के सीधे अलॉटमेंट में भाग नहीं ले सकते। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत से निवेशक बाद में सेकेंडरी मार्केट के जरिए शेयर खरीद सकते हैं। यह निवेश अंतरराष्ट्रीय ब्रोकर्स और आरबीआई की LRS (Liberalised Remittance Scheme) के तहत किया जा सकता है। आईपीओ के बाद जब शेयर लिस्ट हो जाएंगे, तब उन्हें वैश्विक बाजारों में खरीदा-बेचा जा सकेगा। इस प्रक्रिया में नियमों और विदेशी निवेश सीमाओं का पालन करना जरूरी होगा। कुल मिलाकर यह आईपीओ वैश्विक टेक और स्पेस सेक्टर में एक बड़ा इवेंट माना जा रहा है।
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