मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग का एक प्रेरणादायक विचार आज व्यापक चर्चा में है। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में सबसे निश्चित रूप से असफल होने वाली रणनीति जोखिम न लेना है। उनका मानना है कि परिवर्तन के दौर में नवाचार और अनुकूलन बेहद जरूरी हैं। जो लोग या संगठन बदलाव से बचने की कोशिश करते हैं, वे पीछे छूट सकते हैं। जुकरबर्ग ने नई चुनौतियों को अवसर के रूप में देखने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि सफलता के लिए प्रयोग और सीखने की मानसिकता आवश्यक है। तेजी से विकसित होती तकनीक और बाजार परिस्थितियों में लचीलापन महत्वपूर्ण बन गया है। उनका संदेश युवाओं, उद्यमियों और पेशेवरों के लिए विशेष रूप से प्रेरणादायक माना जा रहा है। यह विचार बताता है कि असफलता के डर से प्रयास न करना सबसे बड़ा जोखिम हो सकता है। बदलते समय के साथ खुद को ढालना दीर्घकालिक सफलता की कुंजी है। जुकरबर्ग का यह उद्धरण आत्मविश्वास और नवाचार को बढ़ावा देने वाला माना जा रहा है।
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