दिल्ली की उपभोक्ता अदालत ने मेडिक्लेम प्रतिपूर्ति से जुड़े एक मामले में पहले दिए गए भुगतान आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने माना कि बीमा कंपनी द्वारा दावा खारिज करना उचित था। मामले की जांच के दौरान अस्पताल के रिकॉर्ड में कई गंभीर खामियां और विसंगतियां सामने आईं। जांच रिपोर्ट में दस्तावेजों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए गए। रिकॉर्ड में कथित तौर पर हेरफेर और तथ्यों में असंगति पाई गई। अदालत ने यह भी नोट किया कि बीमाधारक ने जांच प्रक्रिया में अपेक्षित सहयोग नहीं किया। फैसले में कहा गया कि जांचकर्ता की रिपोर्ट को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने पाया कि उपलब्ध साक्ष्य बीमा कंपनी के पक्ष का समर्थन करते हैं। बीमा कंपनी ने पॉलिसी की शर्तों के अनुरूप कार्रवाई की थी। इसलिए दावा अस्वीकार करने का निर्णय मनमाना नहीं माना गया। अदालत ने कहा कि बीमा दावों के निपटारे में दस्तावेजों की सत्यता बेहद महत्वपूर्ण है। अंततः बीमा कंपनी को राहत देते हुए उसके फैसले को वैध ठहराया गया।
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