भारतीय रिजर्व बैंक ने मौद्रिक नीति में ब्याज दरों को यथावत रखने का फैसला किया है। हालांकि अर्थव्यवस्था के सामने कई चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया है। इसके बावजूद समिति ने आपूर्ति पक्ष से जुड़े दबावों को फिलहाल अस्थायी मानते हुए संतुलित रुख अपनाया है। खाद्य वस्तुओं की कीमतों और आपूर्ति संबंधी बाधाओं पर विशेष नजर रखी जा रही है। वैश्विक बाजारों में कीमतों के उतार-चढ़ाव से महंगाई पर असर पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक घटनाक्रम भी आर्थिक अनिश्चितता बढ़ा रहे हैं। मानसून की स्थिति को लेकर भी चिंताएं बनी हुई हैं। कमजोर या असमान बारिश का असर खाद्य महंगाई पर पड़ सकता है। आरबीआई ने संकेत दिया है कि वह बदलती परिस्थितियों पर लगातार नजर रखेगा। जरूरत पड़ने पर नीतिगत कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में महंगाई और वैश्विक परिस्थितियां नीति निर्धारण की दिशा तय करेंगी।
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