एक नई रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि वर्ष 2060 तक भारत वैश्विक जीडीपी में हिस्सेदारी के मामले में चीन को पीछे छोड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले दशकों में भारत की आर्थिक भूमिका लगातार मजबूत होने की संभावना है। वहीं चीन की वैश्विक आर्थिक हिस्सेदारी पहले स्थिर होगी और बाद में उसमें गिरावट देखी जा सकती है। इस बदलाव का एक प्रमुख कारण दोनों देशों की जनसंख्या प्रवृत्तियों को माना गया है। चीन की जनसंख्या हिस्सेदारी तेजी से घटने की ओर बढ़ रही है। इसके विपरीत भारत अपेक्षाकृत अनुकूल जनसांख्यिकीय स्थिति का लाभ उठा सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कार्यशील आयु वर्ग की बड़ी आबादी भारत की आर्थिक वृद्धि को समर्थन दे सकती है। बढ़ता उपभोग, निवेश और श्रमबल भी इस विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि दीर्घकालिक आर्थिक प्रदर्शन में जनसंख्या संरचना का बड़ा प्रभाव पड़ता है। रिपोर्ट ने भारत और चीन के बीच असमानता के स्तर में भी उल्लेखनीय अंतर की ओर ध्यान दिलाया है। दोनों देशों की विकास यात्रा और सामाजिक-आर्थिक चुनौतियां अलग-अलग बनी हुई हैं। भारत के लिए शिक्षा, कौशल विकास और बुनियादी ढांचे में निवेश को महत्वपूर्ण बताया गया है। चीन के सामने वृद्ध होती आबादी और घटती जन्म दर जैसी चुनौतियां हैं। रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि यदि वर्तमान रुझान जारी रहते हैं, तो भारत आने वाले दशकों में वैश्विक अर्थव्यवस्था में और अधिक प्रभावशाली भूमिका निभा सकता है।
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