हृदय रोग विशेषज्ञ अब केवल एलडीएल कोलेस्ट्रॉल पर निर्भर रहने के बजाय अन्य महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संकेतकों पर भी ध्यान देने की सलाह दे रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार, कुछ नए बायोमार्कर हृदयाघात और स्ट्रोक के जोखिम का अधिक व्यापक आकलन करने में मदद कर सकते हैं। इनमें ApoB एक महत्वपूर्ण संकेतक माना जा रहा है, जो रक्त में हानिकारक लिपोप्रोटीन कणों की संख्या दर्शाता है। hs-CRP शरीर में सूजन के स्तर का संकेत देता है और हृदय रोग के जोखिम से जुड़ा हो सकता है। इंसुलिन रेजिस्टेंस भी एक महत्वपूर्ण कारक है, जो शरीर की चयापचय संबंधी समस्याओं को दर्शाता है। पेट के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी यानी एब्डॉमिनल ओबेसिटी को भी हृदय स्वास्थ्य के लिए जोखिम कारक माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ये संकेतक केवल कोलेस्ट्रॉल जांच से अधिक विस्तृत जानकारी प्रदान कर सकते हैं। इनसे रक्त वाहिकाओं, सूजन और चयापचय संबंधी समस्याओं का बेहतर आकलन संभव होता है। जोखिम कारकों की समय रहते पहचान से रोकथाम के उपाय जल्दी शुरू किए जा सकते हैं। स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम का महत्व भी इस संदर्भ में रेखांकित किया गया है। डॉक्टरों का मानना है कि व्यापक जांच और जागरूकता से हृदय रोगों के खतरे को कम किया जा सकता है।
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