आंध्र प्रदेश सरकार ने घटती जन्म दर और बढ़ती वृद्ध जनसंख्या को देखते हुए अधिक बच्चों को जन्म देने के लिए नकद प्रोत्साहन योजना शुरू की है। इस नीति के तहत तीसरे बच्चे पर 30 हजार और चौथे बच्चे पर 40 हजार रुपये देने का प्रावधान है। आलोचकों का कहना है कि यह नीति पहले की जनसंख्या नियंत्रण नीतियों से पूरी तरह उलट है। यह योजना बच्चों के पालन-पोषण के बढ़ते खर्च और महिलाओं की सेहत को नजरअंदाज करती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के प्रोत्साहन लैंगिक असमानता को और बढ़ावा देंगे। यह नीति मजबूत सामाजिक सुरक्षा तंत्र और महिला सशक्तिकरण की अनदेखी करती है। महिलाओं पर अधिक बच्चे पैदा करने का दबाव पड़ेगा, जिससे उनकी शारीरिक और मानसिक सेहत प्रभावित होगी। यह योजना पितृसत्तात्मक मान्यताओं को मजबूत करने वाली है। जनसंख्या संबंधी चिंताओं का समाधान बिना महिलाओं पर बोझ डाले, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के माध्यम से होना चाहिए। कुल मिलाकर, यह नीति महिलाओं के शोषण का एक नया रूप है।
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