छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय ने 3 अप्रैल को खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के समापन पर बड़ी पुरस्कार राशि की घोषणा की थी। व्यक्तिगत स्पर्धाओं में स्वर्ण पर ₹2 लाख, रजत पर ₹1.5 लाख और कांस्य पर ₹1 लाख देने का वादा किया गया था। टीम स्पर्धाओं में प्रति खिलाड़ी ₹1 लाख, ₹75 हजार और ₹50 हजार देने की बात कही गई थी। लेकिन 60 दिन बीत जाने के बाद भी लगभग 81 खिलाड़ियों के खाते में एक रुपया नहीं आया है। यह राशि विभागों और नियमों के जाल में फंसकर रुक गई है। खेल विभाग ने प्रस्ताव भेजा तो वित्त मंत्रालय ने नियमों में टकराव का हवाला देकर फाइल लौटा दी। मौजूदा छत्तीसगढ़ क्रीड़ा प्रोत्साहन योजना में सीएम की घोषणा से कम राशि का प्रावधान है। साथ ही उम्र और खिलाड़ी बनाम टीम आधारित मानदंडों में भी अंतर है। अब विभाग नियमों में संशोधन कर फिर से फाइल वित्त को भेजेगा। इस प्रक्रिया में और समय लग सकता है। खिलाड़ियों ने बताया कि देरी से मिली राशि से उनकी तैयारी प्रभावित हो रही है। कोचिंग, डाइट और सप्लीमेंट के खर्चे मुश्किल से जुटा पा रहे हैं। कुछ खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय चैंपियनशिप की तैयारी के लिए समय पर पैसे न मिलने का दुख भी जताया।
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