भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को तेज गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई। बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी 50 दोनों में लगभग 1 प्रतिशत की कमजोरी देखने को मिली। बाजार पर सबसे बड़ा दबाव अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का रहा, जिससे वैश्विक निवेशकों का जोखिम लेने का रुझान प्रभावित हुआ। भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी आई है। तेल कीमतों में बढ़ोतरी से भारत की आयात लागत और महंगाई संबंधी चिंताएं बढ़ गई हैं। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली ने भी बाजार पर दबाव बनाया। हाल के दिनों में विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय शेयरों से बड़े पैमाने पर धन निकाला गया है। आईटी शेयरों में कमजोरी और वैश्विक बाजारों से मिले नकारात्मक संकेतों ने भी गिरावट को बढ़ावा दिया। बढ़ती बॉन्ड यील्ड और रुपये पर दबाव ने निवेशकों की सतर्कता और बढ़ा दी है। व्यापक बाजार में भी बिकवाली देखने को मिली, जिससे मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर प्रभावित हुए। विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य-पूर्व की स्थिति और तेल कीमतों की दिशा आने वाले दिनों में बाजार की चाल तय कर सकती है। निवेशक फिलहाल वैश्विक घटनाक्रम और विदेशी निवेश प्रवाह पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। बाजार में मौजूदा कमजोरी के पीछे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों कारकों का संयुक्त प्रभाव माना जा रहा है।
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