1869 में, जॉन वेस्ली हयात ने आइवरी (हाथीदांत) के बिलियर्ड बॉल के विकल्प की तलाश में सेल्युलॉयड नामक पहला सफल प्लास्टिक विकसित किया। उन्होंने कपास के रेशे (सेल्युलोज) और कपूर के मिश्रण से एक सख्त, लचीली और सस्ती सामग्री बनाई। इस आविष्कार ने विनिर्माण क्रांति ला दी, क्योंकि अब प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर सामग्रियों का बड़े पैमाने पर उत्पादन संभव हो गया। सेल्युलॉयड जल्द ही फोटोग्राफी की फिल्म, सिनेमैटोग्राफी और फिर कंघी, गुड़िया, और रबर के खिलौने जैसी रोजमर्रा की चीजों में फैल गया। हालाँकि, यह अत्यधिक ज्वलनशील होने के कारण जोखिम भरा था, लेकिन इसने प्लास्टिक युग की नींव रखी। इसने दिखाया कि प्रकृति पर निर्भरता कम करके मानव नवाचार सस्ते और बहुमुखी सामग्री उपलब्ध करा सकता है। आज भी सेल्युलॉयड का उपयोग कुछ टेबल टेनिस बॉल्स और संगीत वाद्ययंत्रों में होता है।
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