सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी को कंप्यूटर आधारित टेस्ट (सीबीटी) मोड में आयोजित कराने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। यह याचिका राजद सांसद सुधाकर सिंह ने दायर की थी। न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि इस वर्ष नीट को सीबीटी मोड में कराना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के सामने कई चुनौतियां और व्यावहारिक दिक्कतें हैं। इसलिए इस साल सीबीटी मोड अपनाने का आदेश देने का कोई सवाल ही नहीं बनता। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी माना कि परीक्षा मोड में बदलाव बिना उचित तैयारी के अराजकता पैदा कर सकता है। फिलहाल नीट परीक्षा पारंपरिक पेन-पेपर मोड (ओएमआर शीट) पर ही होगी। इस फैसले से लाखों अभ्यर्थियों को राहत मिली है, जो पेन-पेपर मोड की तैयारी कर रहे थे। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया था कि सीबीटी से पारदर्शिता बढ़ेगी और गड़बड़ियां कम होंगी। लेकिन कोर्ट ने कहा कि पूरे देश में लाखों परीक्षार्थियों को एक साथ सीबीटी मोड में शामिल कराने के लिए पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी सुविधाओं का अभाव है। एनटीए ने भी कोर्ट को बताया कि अचानक मोड बदलने से परीक्षा प्रक्रिया चरमरा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह निर्णय एनटीए की तैयारियों और छात्र हितों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। भविष्य में धीरे-धीरे सीबीटी मोड लाने की संभावना पर विचार किया जा सकता है, लेकिन इस वर्ष नहीं। इस फैसले के बाद अब पेन-पेपर मोड की तैयारी जारी रहेगी।
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