ब्रिटेन में रह रहे एक श्रीलंकाई परिवार को निर्वासन (deportation) का सामना करना पड़ रहा है, जबकि मां का वीजा पहले ही बढ़ाया जा चुका है। इसके बावजूद अधिकारियों के फैसले के तहत परिवार के बच्चों को भी देश छोड़ने का आदेश दिया गया है। इस मामले ने आव्रजन नीति और मानवीय पहलुओं को लेकर बहस छेड़ दी है। परिवार का कहना है कि वे लंबे समय से ब्रिटेन में रह रहे हैं और यहीं उनकी जिंदगी बस चुकी है। हालांकि इमिग्रेशन नियमों के अनुसार उनके आवेदन को स्वीकार नहीं किया गया। इस निर्णय से परिवार मानसिक तनाव में है। मानवाधिकार संगठनों ने इस मामले पर चिंता जताई है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में नियम और मानवीय आधार के बीच टकराव देखने को मिलता है। स्थानीय समुदाय भी इस परिवार के समर्थन में सामने आया है। मामला अब कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ रहा है। सरकार की ओर से अभी तक कोई अतिरिक्त राहत नहीं दी गई है। यह घटना ब्रिटेन की आव्रजन नीति पर नई बहस को जन्म दे रही है।
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