हिंदू धर्म में अंतिम संस्कार से जुड़ी कई परंपराएं और मान्यताएं प्रचलित हैं। इनमें से एक महत्वपूर्ण परंपरा दाह संस्कार के बाद पीछे मुड़कर न देखने की है। गरुड़ पुराण के अनुसार इसका संबंध मृतक की आत्मा और उसके अगले लोक की यात्रा से जुड़ा माना जाता है। मान्यता है कि पीछे मुड़कर देखने से परिजनों का मोह और लगाव बना रह सकता है। यह परंपरा जीवित लोगों को भावनात्मक रूप से आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। धार्मिक दृष्टि से माना जाता है कि आत्मा को सांसारिक बंधनों से मुक्त होकर अपनी अगली यात्रा पूरी करनी चाहिए। इसलिए अंतिम विदाई के बाद पीछे न देखने का नियम बताया गया है। इस परंपरा का उद्देश्य मृतक और परिजनों दोनों के लिए मानसिक शांति सुनिश्चित करना माना जाता है। गरुड़ पुराण में जीवन, मृत्यु और आत्मा से जुड़े कई आध्यात्मिक सिद्धांतों का उल्लेख मिलता है। इन मान्यताओं के अनुसार अत्यधिक मोह आत्मा की यात्रा में बाधा बन सकता है। इसलिए अंतिम संस्कार के बाद विरक्ति और स्वीकार्यता का भाव रखने की सलाह दी जाती है। धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से परिजनों को मानसिक रूप से मजबूत बनाने का भी प्रयास किया जाता है। यह परंपरा आज भी अनेक परिवारों द्वारा श्रद्धा और विश्वास के साथ निभाई जाती है।
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