सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी विभागों में कार्यरत अस्थायी और कैजुअल मजदूरों के हित में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद ऐसे कर्मचारियों को पेंशन संबंधी लाभ दिए जाने चाहिए। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि पेंशन पाने के लिए नौकरी का नियमित होना अनिवार्य नहीं है। यह फैसला एक महिला की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आया है। महिला ने अपने दिवंगत पति के अधिकारों के लिए करीब 18 वर्षों तक न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। उनके पति ने लगभग तीन दशक तक सरकारी विभाग में सेवा दी थी। इसके बावजूद उन्हें नियमित कर्मचारी का दर्जा नहीं मिला था। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने सेवा अवधि और वास्तविक कार्य को महत्वपूर्ण माना। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लंबे समय तक सरकारी काम करने वाले कर्मचारियों के साथ न्याय होना चाहिए। फैसले से देशभर के अनेक अस्थायी सरकारी कर्मियों को राहत मिल सकती है। यह निर्णय सामाजिक सुरक्षा और कर्मचारी अधिकारों को मजबूत करने वाला माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे समान प्रकृति के अन्य मामलों पर भी प्रभाव पड़ सकता है। सरकार और संबंधित विभागों को अब इस निर्णय के अनुरूप कार्रवाई करनी होगी।
Source: Source