भारत तेजी से अपनी रक्षा आयात (defence import) पर निर्भरता कम कर रहा है और स्वदेशी हथियारों का विशाल अर्सनल तैयार कर रहा है। अग्नि-5 (Agni-5) जैसी अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों से लेकर आकाश मिसाइल प्रणाली (Akash missile system) और हाइपरसोनिक (hypersonics) तकनीक में भारत आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। इस अर्सनल में परमाणु पनडुब्बियां (nuclear submarines), एंटी-ड्रोन सिस्टम (anti-drone systems), और स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड हथियार (SAAW) भी शामिल हैं। यह रणनीतिक बदलाव भारत को न केवल रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भर बना रहा है, बल्कि वैश्विक रक्षा नवाचार में एक प्रमुख भागीदार के रूप में स्थापित कर रहा है। इसके अलावा, भारत ने हाल ही में 30,000 स्वदेशी आर्टिलरी गोले का ऑर्डर देकर ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूती दी है। भारत अब रक्षा प्रौद्योगिकी का एक निर्यातक (exporter) भी बनने के लिए तैयार है।
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