प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर निधि (PM SVANidhi) योजना को केंद्र सरकार ने मार्च 2030 तक बढ़ा दिया है। यह योजना कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू की गई थी, ताकि स्ट्रीट वेंडर्स को बिना गारंटी के कार्यशील पूंजी ऋण मुहैया कराया जा सके। जून 2020 में लॉन्च इस योजना का उद्देश्य शहरी रेहड़ी-पटरी वालों को संस्थागत क्रेडिट, डिजिटल भुगतान और कल्याण योजनाओं से जोड़कर औपचारिक वित्तीय प्रणाली में लाना था। इस योजना के तहत अब तक 75 लाख से अधिक लाभार्थियों ने लाभ उठाया है, जिनमें करीब 46 प्रतिशत महिलाएं और 70 प्रतिशत वंचित समुदायों के लोग शामिल हैं। योजना तीन चरणों में बिना गारंटी के 10,000, 20,000 और 50,000 रुपये तक का ऋण प्रदान करती है। निर्धारित समय पर ऋण चुकाने पर लाभार्थी बड़ी ऋण राशि और सब्सिडी के पात्र हो जाते हैं। डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए 1,600 रुपये तक का कैशबैक दिया जाता है। दूसरे चरण का ऋण पूरा करने वालों को 30,000 रुपये तक का UPI-लिंक्ड रुपे क्रेडिट कार्ड भी दिया जाता है। इसके अलावा, लाभार्थियों को स्वाभिमान से समृद्धि (SSS) जैसी कल्याणकारी योजनाओं से भी जोड़ा जा रहा है। अब तक 1.12 करोड़ से अधिक ऋण वितरित किए जा चुके हैं, जिनकी कुल राशि 17,800 करोड़ रुपये से अधिक है। PM SVANidhi से 95 प्रतिशत लाभार्थियों ने पहली बार औपचारिक संस्थागत क्रेडिट प्राप्त किया है और उनकी औसत वार्षिक आय में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस योजना की 6वीं वर्षगांठ पर इसे रेहड़ी-पटरी वालों के विश्वास, सम्मान और सशक्तिकरण का प्रतीक बताया।
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