कवर्धा में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संस्था ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को 12 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा। संस्था का कहना है कि आजादी के 77 साल बाद अब अधिकांश सेनानी जीवित नहीं हैं, लेकिन उनके परिवारों के लिए कोई स्पष्ट नीति नहीं बनी है। सबसे प्रमुख मांग शासकीय नौकरियों और पदोन्नति में सेनानी परिवारों के लिए 5 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की है। उनका तर्क है कि उत्तराखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में यह व्यवस्था पहले से मौजूद है। ज्ञापन में यह भी मांग की गई कि सेनानियों के गृहग्राम या जिला मुख्यालय में उनकी आदमकद प्रतिमा स्थापित की जाए। साथ ही उनके जीवन परिचय को स्कूलों की पाठ्यपुस्तकों में शामिल किया जाए, ताकि युवा पीढ़ी उनके बलिदान से प्रेरणा ले सके। संस्था का कहना है कि जिन सेनानियों ने जेल यात्राएं की और देश के लिए बलिदान दिया, उनकी स्मृतियों का संरक्षण करना सरकार का कर्तव्य है। अब तक सरकार की ओर से इन मांगों पर कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई है। संस्था ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन करेंगे। उनका कहना है कि अन्य राज्यों की तर्ज पर छत्तीसगढ़ सरकार को भी यह कदम उठाना चाहिए। यह मुद्दा अब राजनीतिक गलियारों में गरमाने लगा है। स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों को उनके अधिकार दिलाने के लिए यह आवाज़ उठना एक ऐतिहासिक पहल मानी जा रही है।
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