छत्तीसगढ़ सरकार ने लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत कई सेवाओं की नई समय-सीमा तय की है, लेकिन इससे व्यवस्था की विसंगतियाँ उजागर हुई हैं। EWS (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) प्रमाणपत्र बनवाने के लिए आम नागरिकों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है, जबकि शराब परमिट मात्र पाँच दिनों में तैयार हो जाता है। इस अंतर ने लोगों में रोष पैदा कर दिया है, क्योंकि गरीब और जरूरतमंद वर्गों के लिए जरूरी दस्तावेजों में देरी हो रही है। शिक्षा, नौकरी और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए EWS प्रमाणपत्र अत्यंत आवश्यक है, लेकिन इसकी धीमी प्रक्रिया से हितग्राही परेशान हैं। दूसरी ओर, शराब परमिट जैसी गैर-जरूरी सेवा को प्राथमिकता देना सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़ा करता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जहाँ एक ओर गरीबों के अधिकारों के लिए कागजात अटके हैं, वहीं मनोरंजक गतिविधियों के लिए परमिट फटाफट जारी हो रहे हैं। इस विसंगति ने लोक सेवा गारंटी अधिनियम की विश्वसनीयता पर ही प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अधिकारियों का तर्क है कि विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली अलग है, लेकिन लोग इसे स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं। विपक्षी दलों ने इस मामले को विधानसभा में उठाते हुए सरकार की खिल्ली उड़ाई है। नागरिकों का कहना है कि EWS प्रमाणपत्र जैसी मूलभूत सेवा के लिए समय-सीमा को घटाकर 15 दिन करना चाहिए, जैसा शराब परमिट के लिए है। प्रशासन ने समस्या को स्वीकार किया है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इस बीच, जिलों में EWS प्रमाणपत्र के लिए आवेदनों का अंबार लग गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च न्यायालय ने भी सरकार से जवाब मांगा है। यह स्थिति प्रदेश में शासन की मंशा और जनहित के प्रति संवेदनशीलता पर गहरा संकट पैदा करती है।
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