छत्तीसगढ़ में कांग्रेस विधायक रामकुमार टोप्पो के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद राज्य की सियासत गरमा गई है। यह एफआईआर एक आपराधिक मामले में दर्ज की गई है, जिससे विधानसभा में हंगामे की स्थिति बन गई है। रामकुमार टोप्पो पर गंभीर धाराओं में केस दर्ज होने के बाद विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा है। जानकारी के अनुसार, पिछले ढाई वर्षों के दौरान छत्तीसगढ़ में नौ विधायकों के खिलाफ गंभीर अपराधों में एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। ये मामले हत्या के प्रयास, बलवा, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश जैसी धाराओं से जुड़े हैं। वहीं, रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश में कुल 23 विधायक अलग-अलग आपराधिक मामलों में घिरे हुए हैं, जो चिंता का विषय है। इनमें से कई विधायकों पर एक से अधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें कुछ अदालत में विचाराधीन हैं। रामकुमार टोप्पो के खिलाफ एफआईआर के बाद प्रदेश के राजनीतिक दलों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाने शुरू कर दिए हैं। विपक्षी भाजपा ने कहा है कि कांग्रेस सरकार अपराधियों को संरक्षण दे रही है, जबकि सत्तारूढ़ दल इसे राजनीतिक षड्यंत्र बता रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, विधायकों के खिलाफ बढ़ते आपराधिक मामले राज्य की छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं। लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों पर अपराध के मामले गंभीर सवाल खड़े करते हैं। विधानसभा में इस मुद्दे पर जमकर नारेबाजी हुई और सदन की कार्यवाही बाधित हुई। प्रदेश के मुख्यमंत्री ने मामले की जांच का आश्वासन दिया है, लेकिन विपक्ष हाईकोर्ट से जांच की मांग कर रहा है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, टोप्पो के खिलाफ मामले की जांच तेज कर दी गई है और जल्द ही गवाहों के बयान दर्ज किए जाएंगे। इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ है कि छत्तीसगढ़ विधानसभा में अपराधी विधायकों का काफिला बढ़ता जा रहा है, जो लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है।
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