दिल्ली हाईकोर्ट ने एक मानवीय फैसले में UAPA (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) से जुड़े एक आरोपी को उसकी बेटी की शादी में शामिल होने के लिए तीन दिन की अंतरिम जमानत दी है। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि आरोपी की यात्रा और ठहरने का पूरा खर्च सरकार उठाएगी। आरोपी आतंकी मामले में उच्च सुरक्षा वाले मामले में न्यायिक हिरासत में था। अदालत ने कहा कि परिवार के सदस्य के विवाह जैसे पवित्र अवसर में आरोपी की भागीदारी एक बुनियादी मानवाधिकार है। हालांकि, अदालत ने सख्त शर्तें रखी हैं कि वह इस दौरान कोई आपराधिक गतिविधि नहीं करेगा और पुलिस की निगरानी में रहेगा। वह अपने परिवार से केवल शादी के दौरान ही मिल सकेगा। जमानत अवधि पूरी होने पर उसे वापस आत्मसमर्पण करना होगा। यह फैसला UAPA जैसे कड़े कानून में मानवीय संवेदनशीलता का उदाहरण बन गया है। मानवाधिकार संगठनों ने इस फैसले की सराहना की है। सरकारी अधिवक्ता ने इस फैसले पर अपनी सहमति दी।
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