झज्जर जिले में रिलायंस मेट सिटी परियोजना पर करीब 8 हजार एकड़ किसानों की जमीन ली गई। अब तक यहां 1200 कंपनियां जुड़ चुकी हैं, जिनमें करीब 40 हजार कर्मचारी काम कर रहे हैं। लेकिन स्थानीय किसानों का कहना है कि जिनके परिवारों की जमीन गई, उनके बच्चे बेरोजगार हैं। किसानों ने आरोप लगाया कि अधिकांश नौकरियां बाहरी राज्यों के लोगों को मिल गईं। उन्होंने कहा कि जमीन खरीदते समय उन्हें रोजगार के बड़े सपने दिखाए गए थे। आज वही जमीन करोड़ों में बेची जा रही है, लेकिन स्थानीय परिवार बेरोजगार हैं। मेट सिटी के सीईओ वल्लभ गोयल ने कहा कि सारा देश उनका इलाका है, लेकिन स्थानीय रोजगार पर कोई आंकड़ा साझा नहीं किया। किसानों ने मांग की है कि स्थानीय युवाओं के लिए विशेष रोजगार नीति बनाई जाए। उनका कहना है कि जमीन देने वाले परिवारों को ही पहली प्राथमिकता मिलनी चाहिए। यह मामला विकास और विस्थापन की कड़वी सच्चाई को उजागर करता है।
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