सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक पोस्ट ने मैडोना और फीफा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। पोस्ट में मैडोना को ‘दरवाजे खोलने वाली महान कलाकार’ बताते हुए उनके प्रभाव की सराहना की गई थी। इसमें फीफा विश्व कप जैसे बड़े आयोजनों का भी उल्लेख किया गया। समर्थकों का तर्क था कि मैडोना जैसी वैश्विक हस्तियों ने ऐसे मंचों को कलाकारों के लिए अधिक आकर्षक बनाया है। उनका मानना है कि बड़े सितारों की मौजूदगी से अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की लोकप्रियता बढ़ती है। हालांकि, आलोचकों ने इस दृष्टिकोण का विरोध किया। उन्होंने आरोप लगाया कि फीफा अपनी छवि सुधारने के लिए मशहूर हस्तियों का उपयोग करता है। आलोचकों ने संगठन पर वर्षों से लगते रहे भ्रष्टाचार और मानवाधिकार संबंधी आरोपों का भी जिक्र किया। बहस जल्द ही मैडोना की भूमिका से हटकर फीफा की साख और जवाबदेही पर केंद्रित हो गई। कई लोगों ने सवाल उठाया कि क्या बड़े सेलिब्रिटी विवादित संस्थाओं की छवि सुधारने में मदद करते हैं। वहीं कुछ लोगों का कहना था कि कलाकारों को संस्थागत विवादों के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस देखने को मिली। यह चर्चा खेल, मनोरंजन और सामाजिक मुद्दों के आपसी संबंधों को भी उजागर करती है। फिलहाल यह विवाद ऑनलाइन विमर्श का प्रमुख विषय बना हुआ है।
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