भारतीय वायुसेना अपने प्रमुख युद्धक विमान सुखोई-30 एमकेआई के बेड़े का बड़े पैमाने पर आधुनिकीकरण करने जा रही है। यह 63,000 करोड़ रुपये की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है। इस ‘सुपर सुखोई’ कार्यक्रम के तहत विमानों के एवियोनिक्स, सेंसर और मिशन सिस्टम को उन्नत किया जाएगा। इसमें एक नया स्वदेशी एईएसए रडार भी शामिल किया जाएगा, जो दूर से कई दुश्मन ठिकानों पर एक साथ नज़र रख सकता है। साथ ही, एआई-आधारित कंप्यूटर लगाए जाएंगे, जो पायलटों को युद्ध क्षेत्र में त्वरित निर्णय लेने में मदद करेंगे। यह उन्नयन सुखोई विमानों की मारक क्षमता, गतिशीलता और जीवित रहने की क्षमता को कई गुना बढ़ा देगा। फिलहाल वायुसेना के पास 260 से अधिक सुखोई विमान हैं और ये उसकी रीढ़ माने जाते हैं। सुपर सुखोई बनने के बाद ये विमान पांचवीं पीढ़ी के फाइटर से कम नहीं होंगे। यह परियोजना रूसी मूल के विमानों में स्वदेशी प्रौद्योगिकी को एकीकृत करने की दिशा में बड़ी छलांग है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इससे चीन और पाकिस्तान जैसी सीमाओं पर भारत की हवाई श्रेष्ठता बनी रहेगी। आधुनिकीकरण में नए इंजन, हथियार नियंत्रण प्रणाली और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली भी शामिल होंगे। यह सभी अपग्रेड भारतीय कंपनियों द्वारा डिजाइन और विकसित किए जाएंगे। पहले विमान को चरणबद्ध तरीके से अपग्रेड करने की प्रक्रिया अगले कुछ वर्षों में शुरू होगी। इस कार्यक्रम से भारत को विमानन प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने में भी मदद मिलेगी। वायुसेना प्रमुख ने इसे देश की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है।
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