तमिलनाडु के कृष्णागिरि जिले में आम के किसानों ने कम भाव और लगातार फसल के नुकसान से परेशान होकर अपने उत्पाद सड़कों पर फेंक दिए हैं। कई किसान तो आम के पेड़ ही काट रहे हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि खेती करना घाटे का सौदा हो गया है। किसानों, पल्प फैक्ट्री मालिकों और अधिकारियों के बीच हुई एक बैठक में कोई सहमति नहीं बन पाई। किसानों की मांग है कि उन्हें प्रति किलोग्राम कम से कम 20 रुपये मिलने चाहिए, जबकि फैक्ट्रियां बढ़ती लागत का हवाला देकर यह दाम देने से इनकार कर रही हैं। किसानों का आरोप है कि बिचौलिए और व्यापारी उनका शोषण कर रहे हैं, कम दाम पर खरीदकर ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं। बैठक की विफलता के बाद किसानों ने आम के बोरे सड़क किनारे फेंक दिए और प्रदर्शन शुरू कर दिया। यह स्थिति क्षेत्र में बेहद दयनीय हो गई है, क्योंकि किसान पिछले दो साल से लगातार नुकसान उठा रहे हैं। किसानों का कहना है कि सरकार उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रही है। यदि जल्द उचित मूल्य नहीं मिला तो वे आम की खेती ही छोड़ देंगे। स्थानीय प्रशासन ने मामले को शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन किसान अड़े हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना किसानों के समर्थन के फल प्रसंस्करण उद्योग भी प्रभावित होगा। फिलहाल, किसानों का आंदोलन जारी है और वे न्यूनतम समर्थन मूल्य की तर्ज पर फलों के लिए भी नीति बनाने की मांग कर रहे हैं।
Source: Source