ब्रिटेन सरकार अगले वर्ष से शरण मांगने वाले प्रवासियों की आयु का आकलन करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित फेसियल रिकग्निशन तकनीक लागू करने की तैयारी कर रही है। गृह मंत्रालय का कहना है कि यह प्रणाली उन मामलों की पहचान करने में मदद करेगी, जहां वयस्क व्यक्ति खुद को नाबालिग बताने की कोशिश करते हैं। अधिकारियों के अनुसार नई तकनीक उम्र संबंधी दावों की प्रारंभिक जांच को अधिक तेज और प्रभावी बनाएगी। सरकार का मानना है कि इससे आव्रजन और शरण प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी। इस तकनीक का उपयोग पारंपरिक आयु मूल्यांकन प्रक्रियाओं के पूरक के रूप में किया जाएगा। गृह मंत्रालय का दावा है कि इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होगा और गलत दावों को पहचानने में सहायता मिलेगी। हालांकि, इस योजना को लेकर गोपनीयता और सटीकता संबंधी सवाल भी उठ रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि केवल चेहरे के आधार पर उम्र का अनुमान हमेशा विश्वसनीय नहीं हो सकता। मानवाधिकार संगठनों ने भी तकनीक के उपयोग में सावधानी बरतने की आवश्यकता पर जोर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि AI आधारित प्रणालियों में त्रुटि की संभावना को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सरकार ने कहा है कि तकनीक का उपयोग उचित दिशानिर्देशों और निगरानी के तहत किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार इसका उद्देश्य वास्तविक नाबालिगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और प्रक्रिया के दुरुपयोग को रोकना है। योजना के लागू होने से पहले इसके परीक्षण और मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। यह कदम आव्रजन प्रबंधन में AI तकनीक के बढ़ते उपयोग का एक और उदाहरण माना जा रहा है।
Source: Source