कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के साथ लंबे सत्ता संघर्ष के बाद पद से इस्तीफा दे दिया है। कांग्रेस हाईकमान ने उन्हें राज्यसभा की सीट और राष्ट्रीय पद की पेशकश की थी। लेकिन सिद्दारमैया ने यह कहते हुए ठुकरा दिया कि वह विधायक के रूप में सेवा देना चाहते हैं। उनका यह फैसला राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। सिद्दारमैया को ‘आकस्मिक राजनेता’ कहा जाता है क्योंकि उन्होंने वकालत से राजनीति में प्रवेश किया था। उनके कार्यकाल में कल्याणकारी योजनाओं और पिछड़ा वर्ग के समर्थन पर जोर दिया गया। उनके इस्तीफे के साथ ही कर्नाटक की राजनीति में एक युग का अंत हुआ है। अब सवाल यह है कि सिद्दारमैया आगे विपक्ष में अपनी भूमिका निभाएंगे या पार्टी के भीतर से ही सक्रिय रहेंगे। उनके समर्थकों का कहना है कि वह भविष्य में फिर से मुख्यमंत्री पद के दावेदार होंगे। फिलहाल सिद्दारमैया ने साफ किया है कि वह जनता के बीच बने रहेंगे।
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