मेघालय हाईकोर्ट ने 5 साल की बच्ची से यौन शोषण के आरोप में दो शिक्षकों को जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने मामले में प्रथम दृष्टया आरोपों को गंभीर पाया। कोर्ट ने पीड़िता के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार किया। सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि आरोपों के समर्थन में प्रथम दृष्टया मामला बनता है। बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों को अदालत ने बेहद गंभीरता से लिया। कोर्ट ने कथित अपराध की प्रकृति और गंभीरता को जमानत पर निर्णय लेते समय महत्वपूर्ण माना। दोनों आरोपियों की ओर से दायर जमानत याचिकाओं पर अदालत ने विस्तार से विचार किया। अदालत ने पाया कि याचिकाओं में राहत देने के पर्याप्त आधार नहीं हैं। इसके बाद हाईकोर्ट ने दोनों जमानत अर्जियों को खारिज कर दिया। अदालत का यह फैसला बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों की गंभीरता को रेखांकित करता है। फिलहाल दोनों आरोपियों को हाईकोर्ट से जमानत नहीं मिली है।
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