संडरलैंड क्लब के पहले अश्वेत फुटबॉलर रोली ग्रेगोयर ने अपने जीवन के दर्दनाक अनुभव साझा किए हैं। उन्होंने बताया कि फुटबॉल करियर के दौरान उन्हें लगातार नस्लभेदी टिप्पणियों और अपमान का सामना करना पड़ा। यह दर्द इतना गहरा था कि वह 46 वर्षों तक इस बारे में खुलकर बात नहीं कर सके। रोली ने कहा कि कई बार उन्हें लगता था कि काश उन्होंने फुटबॉल कभी खेला ही न होता। मैदान के अंदर और बाहर दोनों जगह उन्हें भेदभाव झेलना पड़ा। उस दौर में अश्वेत खिलाड़ियों के लिए माहौल बेहद कठिन था। उन्होंने बताया कि दर्शकों और विरोधियों की नस्लभेदी गालियां मानसिक रूप से तोड़ देती थीं। लंबे समय तक उन्होंने अपने दर्द को भीतर ही दबाकर रखा। अब वर्षों बाद उन्होंने सच सामने लाने का फैसला किया है। रोली का मानना है कि खेल जगत में नस्लवाद की वास्तविकता को स्वीकार करना जरूरी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि उनकी कहानी से नई पीढ़ी को जागरूकता मिलेगी। फुटबॉल समुदाय में उनके बयान के बाद समर्थन और संवेदना की लहर देखी जा रही है। कई लोगों ने उनके साहस की सराहना की है। यह कहानी खेल जगत में समानता और सम्मान की जरूरत को फिर उजागर करती है।
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