फरीदाबाद में एक नाबालिग लड़की करीब 4 साल पहले अपने मामा के साथ आई थी, लेकिन भीड़ में बिछड़ गई। गरीबी और अशिक्षा के कारण परिवार ने गुमशुदगी दर्ज नहीं कराई। नाबालिग एक चाइल्ड शेल्टर होम में रह रही थी। पुलिस ने काउंसलिंग करवाई और नाबालिग की पहचान तलाशने का प्रयास किया। पुलिस ने विभिन्न जिलों के नाम नाबालिग के सामने बोले, जिससे उसकी पहचान हुई। पुलिस ने झारखंड के थानों और ग्राम प्रधानों से संपर्क साधा और परिवार को सौंप दिया। परिवार को वीडियो कॉल पर बेटी दिखाई गई, तो वे फूट-फूटकर रो पड़े। कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद नाबालिग को परिवार को सौंप दिया गया। यह ऑपरेशन पुलिस की संवेदनशीलता और ईमानदारी का परिचायक है। नाबालिग को मिलाने के लिए पुलिस ने कड़ी मेहनत की। परिवार को अपनी बेटी मिल गई, जिससे वे बहुत खुश हैं।
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