महज 21 साल की उम्र में तीरंदाज चिकीथा राव तनीपार्थी ने अपने संघर्ष और मेहनत के दम पर एशियन गेम्स के लिए जगह बना ली है। वह कंपाउंड आर्चरी स्पर्धा में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। अपने खेल करियर में कई उतार-चढ़ाव झेलने के बाद उन्होंने वापसी करते हुए चयनकर्ताओं का भरोसा जीता है। चिकीथा का मुख्य लक्ष्य सिर्फ व्यक्तिगत सफलता नहीं बल्कि देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना है। वह अपनी जीत को अपने परिवार के सपनों से भी जोड़कर देखती हैं। उनका सपना है कि पदक जीतने के बाद अपने पिता के लिए नया हार्वेस्टर खरीद सकें, ताकि परिवार की खेती में मदद मिल सके। इसके साथ ही वह अपने कोच अभिषेक वर्मा को उनके मार्गदर्शन के लिए एक खास उपहार देना चाहती हैं। कोच ने उनके खेल को निखारने में अहम भूमिका निभाई है। चिकीथा का मानना है कि कठिन परिस्थितियों ने उन्हें मजबूत बनाया है। एशियन गेम्स को लेकर वह पूरी तरह से तैयार और आत्मविश्वास से भरी हुई हैं। उनकी कहानी युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है।
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