2011 में कनाडा के एक तेल रेत (ऑयल सैंड्स) खदान में एक दुर्घटनावश हुई खुदाई के दौरान 110 मिलियन साल पुराना एक विशाल बख्तरबंद डायनासोर का जीवाश्म मिला। इस नए प्रजाति का नाम बोरियालोपेल्टा मार्कमिचेल्ली (Borealopelta markmitchelli) रखा गया। यह एक नोडोसॉर (Nodosaur) था, जिसकी त्वचा और कवच (armor) लगभग पूरी तरह सुरक्षित अवस्था में मिले। इस खोज ने वैज्ञानिकों को क्रेटेशियस काल के उस जीवन को समझने में अभूतपूर्व मदद की है। यह डायनासोर समुद्री तलछट में दबा हुआ था, जिससे इसके संरक्षण में मदद मिली। इसके पेट में अंतिम भोजन के अवशेष भी मिले हैं। यह खोज पैलियंटोलॉजी के इतिहास में सबसे उल्लेखनीय खोजों में से एक है। इससे पता चलता है कि अप्रत्याशित स्थानों पर भी बड़े वैज्ञानिक खुलासे हो सकते हैं। अब यह जीवाश्म रॉयल टाइरेल म्यूजियम में रखा है।
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