प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 1,500 करोड़ रुपये के एक बड़े हाइड्रोपोनिक गांजा रैकेट में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच शुरू कर दी है। यह गिरोह अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग करके घर के अंदर गांजा उगाता था और उसे अवैध रूप से बाजार में खपाता था। जांच एजेंसियों को संदेह है कि इस धंधे से अर्जित काले धन को हवाला और विभिन्न फर्जी कंपनियों के जरिए सफेद किया गया। ईडी अब इस नेटवर्क से जुड़े सभी वित्तीय लेन-देन और बेनामी संपत्तियों का पता लगाने की कोशिश कर रही है। इस रैकेट का दायरा कई राज्यों में फैला होने की आशंका है, जिससे कई प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आ सकते हैं। अधिकारियों ने मुख्य आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी की तैयारी तेज कर दी है। यह हाई-प्रोफाइल मामला मादक पदार्थों के व्यापार के आधुनिक तरीकों को उजागर करता है। ईडी अब यह ट्रैक करने में जुटी है कि इस बड़ी रकम का इस्तेमाल कहां-कहां किया गया है। आने वाले दिनों में मामले में कई बड़ी गिरफ्तारियां संभव हैं। सरकार और एजेंसियां इस तरह के संगठित अपराधों पर नकेल कसने के लिए सख्त कदम उठा रही हैं।
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