हिमाचल हाईकोर्ट में पूर्व मुख्य संसदीय सचिवों को सरकारी बंगले देने के मामले में बुधवार को सुनवाई होगी। मामले में कांग्रेस के छह विधायकों और पूर्व CPS को सरकारी आवास दिए जाने का मुद्दा उठाया गया है। कोर्ट ने मुख्य सचिव से जवाब मांगा है कि बिना आवेदन के आवासों को नियमित किस आधार पर किया गया। पिछली सुनवाई में अदालत ने सरकार के 4 मई 2026 के आदेश पर नाराजगी जताई थी। सरकार ने 1994 के सरकारी आवास आवंटन नियमों के नियम 24 के तहत आवास नियमित किए थे। हाईकोर्ट ने इस फैसले पर राज्य सरकार को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है। अदालत ने सरकार की आवास नीति पर तीखी टिप्पणी करते हुए पारदर्शिता पर सवाल उठाए थे। कोर्ट ने मुख्य सचिव से पूरे मामले के आधार और संबंधित नियमों पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। मुख्य सचिव के हलफनामे से आवास नियमित करने की प्रक्रिया की जानकारी सामने आने की उम्मीद है। अदालत यह भी जानना चाहती है कि इस अवधि के लिए कितना दंडात्मक किराया बनता है। हिमाचल सरकार ने जनवरी 2023 में छह विधायकों को मुख्य संसदीय सचिव नियुक्त किया था। नवंबर 2024 में हाईकोर्ट ने इन नियुक्तियों को असंवैधानिक करार देकर रद्द कर दिया था। अब सरकारी बंगलों को लेकर होने वाली सुनवाई को इसी मामले की अगली महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।
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