सुप्रीम कोर्ट ने 2001 की हरियाणा एचसीएस भर्ती मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के फैसले पर कड़ी नाराजगी जताई है। मामला उन 8 एचसीएस अधिकारियों से जुड़ा है, जिन पर भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी और पक्षपात के जरिए चयन पाने का आरोप है। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने जांच अधिकारी को 26 मई को सभी जरूरी रिकॉर्ड के साथ पेश होने का आदेश दिया है। साथ ही हरियाणा के महाधिवक्ता से भी अदालत की मदद करने को कहा गया है। आदेश पलटने में 3 मिनट लगेंगे कोर्ट ने पूछा कि हाई कोर्ट ने पिछले 15 साल से लंबित इस मामले का फैसला अब तक क्यों नहीं किया। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि जब भर्ती प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ियों के संकेत मिले थे, तब पूरी परीक्षा रद्द क्यों नहीं की गई।
बेंच ने हाई कोर्ट के फैसले को लेकर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे आदेश को पलटने में “तीन मिनट” लगेंगे। कोर्ट ने कहा कि अगर उत्तर पुस्तिकाओं में दोहरी लिखावट, काट-छांट या छेड़छाड़ जैसी बातें मिलती हैं, तो पूरी चयन प्रक्रिया रद्द की जा सकती है। हाईकोर्ट रद्द कर चुका चार्जशीट दरअसल, पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने 4 फरवरी को 8 एचसीएस अधिकारियों के खिलाफ 2023 में दायर चार्जशीट रद्द कर दी थी। हाई कोर्ट का कहना था कि इन अधिकारियों का नाम मूल एफआईआर में नहीं था और 18 साल बाद बिना सही जांच के उन्हें आरोपी बनाया गया,
लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिर्फ देरी होने से जांच रद्द नहीं की जा सकती। अदालत ने यह भी कहा कि हाई कोर्ट ने जांच एजेंसियों के काम में जरूरत से ज्यादा दखल दिया। कांग्रेस नेता करण दलाल से जुड़ा मामला यह मामला कांग्रेस नेता करण दलाल की याचिका से जुड़ा है। उन्होंने 2002 में एचसीएस भर्ती प्रक्रिया में भाई-भतीजावाद और अनियमितताओं के आरोप लगाए थे। ये 8 अधिकारी उन 64 उम्मीदवारों में शामिल थे, जिनका चयन 2002 में हुआ था।
बाद में इन अधिकारियों के नाम आईएएस प्रमोशन के लिए यूपीएससी को भेजे गए पैनल में भी शामिल किए गए थे, लेकिन मामला विवादों में आने के कारण उस पर फैसला अभी तक लंबित है।
: Source