हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल के दूसरे दिन शुक्रवार को बिजली और पानी का संकट गंभीर हो गया। प्रदेश के 23 जिलों में से 17 जिलों में ब्लैकआउट जैसी स्थिति बनने की खबर है। गुरुग्राम में करीब 50 हजार घरों की बिजली गुल होने की सूचना है। यहां पिछले 18 घंटे में शिकायत केंद्र पर बिजली से जुड़ी लगभग 5,000 शिकायतें दर्ज की गईं। जींद में भी करीब 35 घंटे से बिजली आपूर्ति बाधित होने की जानकारी सामने आई है। प्रदेश में लगभग 65 लाख घरेलू बिजली कनेक्शन हैं, जिनमें से करीब 10 लाख पर हड़ताल का सीधा असर पड़ने का अनुमान है। बिजली की मांग घटने के कारण पानीपत थर्मल पावर प्लांट की दो यूनिटों में उत्पादन बंद करना पड़ा। बिजली कटौती के चलते कई क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। हिसार, फरीदाबाद, कुरुक्षेत्र, सोनीपत और कैथल समेत कई शहरों में नाराज उपभोक्ताओं ने सड़क जाम कर प्रदर्शन किया। बिजली निगम के कर्मचारियों और इंजीनियरों की हड़ताल 21 अक्टूबर की रात 10 बजे शुरू हुई थी और इसे 24 अक्टूबर तक जारी रखने का कार्यक्रम है। कर्मचारी हरियाणा इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (HERC) के उस फैसले का विरोध कर रहे हैं, जिसमें 19 अक्टूबर को इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को गुरुग्राम और नूंह में 25 साल के लिए समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने का आदेश दिया गया था। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि इस फैसले से सरकारी बिजली वितरण व्यवस्था और कर्मचारियों के रोजगार पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। हड़ताल के संयुक्त मोर्चे के प्रवक्ता रविंद्र घणगस ने दावा किया कि करीब 40 हजार नियमित और 10 हजार अस्थायी कर्मचारी आंदोलन में शामिल हैं। बढ़ते बिजली संकट के बीच राज्य सरकार ने कर्मचारियों से बातचीत की पहल की है। बिजली मंत्री अनिल विज ने हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा को शुक्रवार दोपहर 3 बजे पंचकूला में वार्ता के लिए बुलाया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा है कि राज्य सरकार आयोग के फैसले को विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण (APTEL) में चुनौती देगी। अनिल विज ने भी कहा कि सरकार निजीकरण के पक्ष में नहीं है और इस मुद्दे पर कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी। सरकार ने कर्मचारियों से हड़ताल समाप्त कर काम पर लौटने की अपील की है।
Source: Source