हरियाणा सरकार ने राज्य में पटवार सर्किलों के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस संबंध में सभी जिलों के उपायुक्तों को आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं। नई व्यवस्था के तहत पटवारियों के कार्यक्षेत्र का निर्धारण केवल भूमि के रकबे के आधार पर नहीं किया जाएगा। अब आबादी और वास्तविक कार्यभार को भी प्रमुख आधार बनाया जाएगा। सरकार का कहना है कि शहरीकरण, म्यूटेशन मामलों में वृद्धि और डिजिटल भूमि रिकॉर्ड जैसी व्यवस्थाओं के कारण पटवारियों का काम काफी बढ़ गया है। नए मानक के अनुसार एक पटवार सर्किल में सामान्यतः लगभग 2000 एकड़ कृषि योग्य भूमि शामिल होगी। स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर यह सीमा 1500 से 2500 एकड़ तक रखी जा सकेगी। प्रत्येक सर्किल में संबंधित राजस्व क्षेत्र की आबादी को भी ध्यान में रखा जाएगा। अधिक जनसंख्या और ज्यादा प्रशासनिक कार्य वाले क्षेत्रों में छोटे पटवार सर्किल बनाए जा सकते हैं। कम आबादी वाले इलाकों में एक पटवारी के अधीन अधिक भूमि रखी जा सकती है। सरकार को उम्मीद है कि इससे भूमि रिकॉर्ड और म्यूटेशन कार्यों में तेजी आएगी। नागरिक सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार होने की संभावना जताई गई है। इस पुनर्गठन के बाद कई जिलों में नए पटवार सर्किल बनाए जा सकते हैं और अतिरिक्त पटवारियों की आवश्यकता भी उत्पन्न हो सकती है।
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