हरियाणा में तीसरी बार सत्ता में आने के बाद भाजपा अब अपने संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बिठाने की कवायद में जुट गई है। पार्टी की रणनीति उन सक्रिय नेताओं और कार्यकर्ताओं को समायोजित करने की है जो लंबे समय से पार्टी के लिए काम कर रहे हैं, लेकिन अभी तक किसी पद पर नहीं हैं। सूत्रों के अनुसार, साल के अंत तक 225 से अधिक नेताओं को विभिन्न बोर्ड, निगम और आयोगों में नियुक्त करने की तैयारी है। इस प्रक्रिया में जातीय समीकरणों, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और संगठनात्मक अनुभव को मुख्य आधार बनाया गया है ताकि हर वर्ग को सरकार में उचित हिस्सेदारी मिल सके। अब तक लगभग 30 नेताओं को विभिन्न संस्थाओं में जगह दी जा चुकी है, और शेष नियुक्तियां चरणबद्ध तरीके से पूरी की जाएंगी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस कदम के जरिए भाजपा आगामी स्थानीय निकाय चुनावों से पहले कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष को खत्म करना चाहती है। यह रणनीति न केवल पार्टी के प्रति निष्ठा रखने वाले कार्यकर्ताओं को सम्मानित करने का माध्यम है, बल्कि सरकार और संगठन के समन्वय को भी मजबूत करेगी। इन नियुक्तियों को हरियाणा की राजनीति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, जिससे जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ने की उम्मीद है।
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