सोने के आभूषण बनाने वाले कारीगर जिन कपड़ों की मदद से ज्वेलरी बनाते हैं, उसे इसके बाद जला देते हैं. यह परंपरा बहुत पुरानी है और इसके पीछे कई कारण हैं. कारीगरों का मानना है कि इससे ज्वेलरी की शुद्धता और पवित्रता बनी रहती है. साथ ही, इससे ज्वेलरी में लगे हुए धातु के अवशेष भी नष्ट हो जाते हैं. यह परंपरा न केवल भारत में बल्कि दुनिया भर में प्रचलित है. कारीगरों के लिए यह परंपरा बहुत महत्वपूर्ण है और वे इसे अपनी ज्वेलरी बनाने की प्रक्रिया का एक हिस्सा मानते हैं. यह परंपरा ज्वेलरी बनाने की प्रक्रिया को और भी विशेष बनाती है. ज्वेलरी बनाने के बाद कपड़े जलाने से ज्वेलरी की गुणवत्ता भी बढ़ जाती है. कारीगरों का मानना है कि यह परंपरा ज्वेलरी को एक विशेष स्थान दिलाती है. यह परंपरा कारीगरों की ज्वेलरी बनाने की कला को भी दर्शाती है.
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