सॉफ्टवेयर इंजीनियर समिथा सुलकना की कहानी आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। नौकरी से निकाले जाने के बाद समिथा ने हताश होने के बजाय उद्यमिता की राह चुनी। उन्होंने अपने गांव में लोगों की जरूरतों को समझते हुए एक मिनी सुपरमार्केट खोलने का फैसला किया। उन्होंने अपनी तकनीकी जानकारी का इस्तेमाल करते हुए इस सुपरमार्केट में एक ऑनलाइन ऑर्डरिंग सिस्टम भी जोड़ दिया। देखते ही देखते उनकी मेहनत रंग लाई और मात्र तीन महीने के भीतर उनके व्यवसाय का दैनिक कारोबार 50,000 रुपये के पार पहुंच गया। यह उपलब्धि साबित करती है कि अगर सही सोच और कौशल का इस्तेमाल किया जाए, तो अवसर खुद बनाए जा सकते हैं। उन्होंने तकनीक और स्थानीय व्यापार का बेहतरीन मेल बिठाकर एक सफल मॉडल पेश किया है। उनकी इस असाधारण यात्रा की सोशल मीडिया पर हर जगह सराहना हो रही है। समिथा ने दिखा दिया कि मुश्किल समय में भी सही निर्णय लेकर आगे बढ़ा जा सकता है। उनकी यह कहानी उन लोगों के लिए सबक है जो अपनी नौकरी खोने के बाद संघर्ष कर रहे हैं। ग्रामीण भारत में डिजिटल क्रांति के जरिए उन्होंने एक मिसाल कायम की है। भविष्य में वह अपने इस स्टार्टअप को और भी बड़े स्तर पर ले जाने की योजना बना रहे हैं।
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