सीहोर जिले के इछावर क्षेत्र में 100 वर्षीय बुजुर्ग की अंतिम इच्छा के अनुसार उनका अंतिम संस्कार पारंपरिक शोक की बजाय संगीत और ढोल-ताशों के साथ किया गया। परिवार और ग्रामीणों ने मातम की जगह उनके जीवन को सम्मानपूर्वक उत्सव की तरह विदाई देने का निर्णय लिया। अंतिम यात्रा के दौरान ढोल-ताशे और डीजे बजाए गए, जिससे माहौल भावुक होने के साथ-साथ सम्मानपूर्ण भी बना रहा। ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में शामिल होकर बुजुर्ग को अंतिम विदाई दी। परिवार का कहना था कि दिवंगत व्यक्ति जीवन को उत्सव की तरह जीने में विश्वास रखते थे। उनकी इच्छा थी कि उनकी अंतिम यात्रा में रोना-धोना नहीं बल्कि संगीत और सम्मान हो। इस अनोखी विदाई ने पूरे गांव में चर्चा का विषय बना दिया। लोगों ने इसे जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण का उदाहरण बताया। अंतिम संस्कार में सामाजिक एकता और परंपरा का अनूठा मिश्रण देखने को मिला। यह घटना क्षेत्र में भावनात्मक रूप से यादगार बन गई।
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