चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सात वर्षों के अंतराल के बाद उत्तर कोरिया की यात्रा करने वाले हैं। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब उत्तर कोरिया अपने परमाणु कार्यक्रम के विस्तार को लेकर लगातार चर्चा में है। उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के नेतृत्व में देश ने हाल के वर्षों में रक्षा और परमाणु क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर दिया है। शी जिनपिंग की प्रस्तावित यात्रा को दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चीन और उत्तर कोरिया लंबे समय से करीबी राजनीतिक और कूटनीतिक साझेदार रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौरे में क्षेत्रीय सुरक्षा और सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय पहले से ही चिंतित है। ऐसे में यह यात्रा वैश्विक स्तर पर विशेष ध्यान आकर्षित कर रही है। दोनों देशों के बीच आर्थिक और राजनीतिक सहयोग को और मजबूत करने की संभावनाएं भी जताई जा रही हैं। क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे बैठक के प्रमुख एजेंडे में शामिल हो सकते हैं। इस दौरे के परिणामों पर अमेरिका, दक्षिण कोरिया और अन्य देशों की भी नजर बनी हुई है। एशिया की भू-राजनीतिक परिस्थितियों के संदर्भ में यह यात्रा महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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