राजधानी में साइबर ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जिससे आम नागरिकों के साथ-साथ बड़े नेता भी अछूते नहीं रहे हैं। हाल ही में विधायक पुरंदर मिश्रा ठगों के शिकार बन गए, जब एक ठग ने खुद को भाजपा नेता का निजी सहायक बताकर उनसे 10,000 रुपए ट्रांसफर करवा लिए। यह घटना छत्तीसगढ़ में साइबर फ्रॉड की बढ़ती गंभीर समस्या को उजागर करती है। पुलिस तेजी से कार्रवाई तो कर रही है, लेकिन शिकायतों की तुलना में रिकवरी बहुत कम हो पा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अकेले पुलिस कार्रवाई से यह समस्या हल नहीं होगी, बल्कि नागरिकों को स्वयं सतर्क रहना होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि कभी भी अनजान नंबरों से आए लिंक पर क्लिक न करें। अपनी व्यक्तिगत जानकारी, ओटीपी या बैंकिंग डिटेल्स किसी से साझा न करें। कोई भी यूआरएल, ऐप या संदेश आए तो उसकी प्रामाणिकता जांचे बिना पैसे न भेजें। अगर ठगी हो जाए तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें और नजदीकी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराएं। ठगी का लेनदेन होते ही उसका स्क्रीनशॉट और डिटेल्स सुरक्षित रखें। विशेषज्ञों के अनुसार, जागरूकता ही इस अपराध से बचने का सबसे प्रभावी हथियार है। साइबर ठग लगातार नए-नए तरीके अपना रहे हैं, इसलिए लोगों को तकनीकी जानकारी के साथ सुरक्षा नियमों को भी गंभीरता से लेना चाहिए।
Source: Source