संयुक्त राष्ट्र ने इज़राइल को यौन हिंसा के आरोपों से जुड़ी अपनी काली सूची में शामिल कर लिया है। यह सूची उन देशों और समूहों के लिए है, जो संघर्ष के दौरान यौन हिंसा में लिप्त पाए गए हैं। इस सूची में पहले से हमास और आईएसआईएस जैसे आतंकी संगठन शामिल हैं। इज़राइल को इसी सूची में रखा गया है, जिसे देश ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। इज़राइल के अधिकारियों ने इस फैसले को अनुचित और राजनीति से प्रेरित बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह फैसला इज़राइल की छवि खराब करने की साजिश है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, गाजा संघर्ष के दौरान यौन हिंसा के कई मामले सामने आए हैं। हालाँकि, इज़राइल इन आरोपों का खंडन करता है और उन्हें निराधार बताता है। यह फैसला अंतरराष्ट्रीय समुदाय में विभाजन को और गहरा कर सकता है। कई देशों ने संयुक्त राष्ट्र के फैसले का समर्थन किया है, जबकि कुछ ने इसे पक्षपातपूर्ण ठहराया है। मानवाधिकार संगठनों ने इस कदम का स्वागत किया है। उनका कहना है कि इससे पीड़ितों को न्याय दिलाने में मदद मिलेगी। दूसरी ओर, इज़राइल ने राजनयिक स्तर पर विरोध दर्ज कराया है। इस सूची का व्यावहारिक प्रभाव यह होगा कि इज़राइल पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ेगा। इस कदम से इज़राइल और संयुक्त राष्ट्र के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। फिलहाल, इज़राइल अपनी सुरक्षा रणनीति की समीक्षा कर रहा है और इस फैसले के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने की बात कर रहा है।
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