प्रसिद्ध संतूर वादक तरुण भट्टाचार्य ने बांसुरी वादक अनिर्बान रॉय को औपचारिक रूप से अपना शिष्य स्वीकार किया है। यह परंपरागत ‘गंडा बंधन’ समारोह के माध्यम से गुरु-शिष्य परंपरा को औपचारिक रूप दिया गया। इस रस्म को संगीत की दुनिया में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, जिसमें अनुशासन और समर्पण का विशेष महत्व होता है। अनिर्बान रॉय पहले से ही मैहर घराने से जुड़े हुए हैं और अब वे तरुण भट्टाचार्य के मार्गदर्शन में अपनी संगीत साधना को आगे बढ़ाएंगे। इस अवसर पर संगीत जगत से जुड़े कई लोगों ने इस नई गुरु-शिष्य जोड़ी का स्वागत किया। इस प्रशिक्षण के माध्यम से उनकी संगीत प्रतिभा को और निखार मिलने की उम्मीद है। यह आयोजन भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा को दर्शाता है।
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