कैपिटल गेन्स टैक्स की योजना बनाने का सबसे अच्छा समय संपत्ति बेचने का आदेश देने से पहले होता है। वित्तीय वर्ष 2026 में इस टैक्स से जुड़े नियमों को दोबारा समझना और उनकी समीक्षा करना उपयोगी है। 1 अप्रैल 2026 से आयकर अधिनियम, 2025 ने आयकर अधिनियम, 1961 की जगह ले ली है। नए कानून के लागू होने से आयकर से संबंधित कई धाराओं की संख्या बदल गई है। इसके अलावा, अब कानून में वित्तीय वर्ष के बजाय ‘टैक्स वर्ष’ शब्द का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, कैपिटल गेन्स यानी पूंजीगत लाभ पर टैक्स लगाने के बुनियादी नियम काफी हद तक पहले जैसे ही हैं। शेयर बेचने से होने वाले लाभ पर लागू टैक्स निवेश की अवधि और संबंधित नियमों पर निर्भर करता है। म्यूचुअल फंड से होने वाले लाभ पर भी फंड की श्रेणी और निवेश अवधि के आधार पर कर देनदारी तय होती है। संपत्ति बेचकर होने वाला मुनाफा भी पूंजीगत लाभ कर के दायरे में आ सकता है। सोने की बिक्री से प्राप्त लाभ पर भी लागू नियमों के अनुसार टैक्स देना पड़ सकता है। अलग-अलग परिसंपत्तियों के लिए पूंजीगत लाभ की गणना और कर की दरें अलग हो सकती हैं। इसलिए निवेश बेचने से पहले खरीद मूल्य, बिक्री मूल्य और निवेश की अवधि की समीक्षा करना जरूरी है। नए आयकर कानून के तहत संबंधित प्रावधानों को समझने से टैक्स की योजना बनाने में मदद मिल सकती है। समय रहते सही जानकारी जुटाने से संभावित कर देनदारी का आकलन करना और वित्तीय फैसले बेहतर ढंग से लेना आसान हो सकता है।
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