सुहिर्था ने एक कठिन बचपन के बाद सुरक्षित जीवन की तलाश में नितीश पर भरोसा किया। दोनों की शादी बहुत जल्दी और परिस्थितियों में हुई। शादी के बाद नितीश के दोस्तों ने सुहिर्था पर बेवफाई का आरोप लगाया। इन आरोपों के बाद नितीश ने उसे घर से बाहर निकाल दिया। इस घटना ने सुहिर्था को गहरे मानसिक आघात में डाल दिया। इस बीच उसने खुद प्रेरित होकर गर्भपात कराया था। बाद में डॉक्टरों ने बताया कि वह वास्तव में गर्भवती थी। इस खुलासे ने उसके जीवन की दिशा बदल दी। सुहिर्था ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद खुद को संभालने का फैसला किया। उसने मां बनने और अपने भविष्य को फिर से बनाने का संकल्प लिया। धीरे-धीरे उसने अपनी जिंदगी में आगे बढ़ने की हिम्मत जुटाई। यह कहानी उसके संघर्ष, दर्द और फिर से उठ खड़े होने की प्रेरणा को दिखाती है।
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